उत्तर प्रदेशचंदौली

राम-वियोग की कथा सुन भावुक हुए श्रद्धालु, सैदूपुर में छलके आंसू

संगीतमय श्रीराम कथा के सातवें दिन आचार्य पूर्णिमा जी ने सुनाया मार्मिक प्रसंग, पंडाल में छाया करुण रस

रिपोर्ट: गणपत राय 

इलिया (चंदौली): श्री राम सेवा समिति सैदूपुर के तत्वाधान में आयोजित नव दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के सातवें दिन गुरुवार की रात का माहौल भावनाओं से भर गया। वृंदावन से पधारी आचार्य पूर्णिमा जी ने राम-वियोग का ऐसा मार्मिक प्रसंग सुनाया कि पूरा पंडाल भाव-विभोर हो उठा और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

कथा के दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा पंडाल अयोध्या बन गया हो और हर श्रोता राजा दशरथ के वियोग को स्वयं महसूस कर रहा हो। आचार्य पूर्णिमा जी ने भगवान श्रीराम के वनवास का प्रसंग अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करते हुए बताया कि कैसे श्रीराम ऋषि वाल्मीकि के आश्रम पहुंचे और चित्रकूट में निवास किया। उन्होंने संतों के सान्निध्य और त्याग के महत्व को भी विस्तार से समझाया।

कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब सुमंत जी के अयोध्या लौटने और राजा दशरथ को श्रीराम के न लौटने का समाचार देने का प्रसंग सुनाया गया। इस प्रसंग को सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे और कई लोगों के आंसू छलक पड़े।

आचार्य जी ने बताया कि पुत्र-वियोग की पीड़ा में डूबे राजा दशरथ को अपने जीवन की वह भूल याद आई, जब उन्होंने अनजाने में श्रवण कुमार का वध किया था। उन्होंने “कर्म का फल हर हाल में मिलता है” का संदेश देते हुए कहा कि राजा दशरथ का अंत भी इसी वियोग की पीड़ा में हुआ।

इस दौरान मनोहर केसरी, पंचम गुप्ता, आजाद केसरी, जयप्रकाश जायसवाल, मकसूदन सेठ, भरत गुप्ता, लाल बहादुर केसरी, पन्नू सेठ, शीला देवी, ममता वर्मा, इंदु देवी, उषा देवी सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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