उत्तर प्रदेशचंदौली

इलिया सहकारी समिति पर खाद के लिए किसानों की लंबी कतार, पर्याप्त खाद नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी

10.5 हेक्टेयर खेत वाले किसान को महज पांच बोरी खाद देने की बात; किसानों ने वितरण व्यवस्था पर उठाए सवाल, जांच की मांग

रिपोर्ट: लारेंस सिंह

इलिया। धान की फसल के महत्वपूर्ण दौर में खाद की मांग बढ़ने के साथ ही इलिया सहकारी समिति पर किसानों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। मंगलवार को खाद लेने के लिए समिति परिसर में किसानों की भारी भीड़ जुटी। किसान घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने से उनमें नाराजगी दिखाई दी।

किसानों का कहना है कि समिति पर जरूरत के मुताबिक खाद की आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि समिति को ऊपर से ही कम मात्रा में खाद मिल रही है या खाद की मांग पर्याप्त मात्रा में नहीं भेजी जा रही है। किसानों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

किसान हिफ़ज़ूर रहमान ख़ान ने बताया कि उनके पास 10.5 हेक्टेयर खेत है, लेकिन अभी तक उन्हें एक भी बोरा खाद नहीं मिला। मंगलवार को समिति पहुंचने पर उन्हें महज पांच बोरी खाद देने की बात कही गई। किसान का सवाल है कि 10.5 हेक्टेयर खेत के लिए पांच बोरी खाद से जरूरत कैसे पूरी होगी।

किसानों के मुताबिक धान की फसल के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समय है। ऐसे में खाद की कमी का सीधा असर फसल के उत्पादन पर पड़ सकता है। सीमित मात्रा में खाद मिलने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

किसानों ने यह भी कहा कि खाद की किल्लत को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित होने के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है। उनका आरोप है कि खबरों और शिकायतों के बाद अधिकारियों की ओर से संज्ञान लेने की बात कही जाती है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।

खाद वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल

खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर किसानों के बीच अनियमितता की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि किसी भी तरह की अनियमितता की अभी पुष्टि नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से समिति के स्टॉक रजिस्टर, प्राप्त खाद की मात्रा, वितरण रजिस्टर और किसानों को वितरित खाद के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि समिति को कितनी खाद मिली, कितनी वितरित हुई और वर्तमान में कितना स्टॉक उपलब्ध है।

किसानों का कहना है कि यदि खाद वितरण व्यवस्था पारदर्शी है तो पूरा रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। वहीं, जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब किसानों की नजर जिला प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों पर है। किसानों ने तत्काल मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने और समिति पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।

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