केवट प्रसंग में झलकी निष्काम भक्ति, श्रीराम कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
खरौझा गांव में संगीतमय श्रीराम कथा के सातवें दिन शालिनी त्रिपाठी ने भक्ति, समर्पण और विश्वास का दिया भावपूर्ण संदेश

रिपोर्ट: गणपत राय
इलिया क्षेत्र के खरौझा गांव में हनुमान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नवदिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का सातवां दिवस भक्ति और श्रद्धा के अद्भुत वातावरण में संपन्न हुआ। देर रात तक चले इस आयोजन में कथा प्रेमी भक्ति रस में सराबोर नजर आए।
मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि यह प्रसंग केवल एक कथा नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और समानता का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीराम गंगा पार करने के लिए केवट से नाव मांगते हैं, तब केवट का उनके चरण धोने का आग्रह अहंकार नहीं बल्कि अटूट प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि केवट को यह विश्वास था कि जिन चरणों के स्पर्श से पत्थर भी जीवंत हो गए, वे यदि उसकी नाव में पड़ेंगे तो उसकी नाव भी दिव्यता को प्राप्त कर सकती है। यही विश्वास सच्ची भक्ति का आधार है।
शालिनी त्रिपाठी ने आगे कहा कि सच्ची भक्ति तभी पूर्ण होती है, जब उसमें “प्रीति” यानी प्रेम और “प्रतीत” यानी विश्वास दोनों का समन्वय हो। केवट ने भगवान से कोई धन या प्रतिफल नहीं मांगा, बल्कि केवल सेवा का अवसर मांगा—जो निष्काम भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनमें राजन सिंह, अस्पताल सिंह, अरविंद मौर्या, पंचू दुबे, लाल बहादुर केसरी, जयप्रकाश जायसवाल, जय नारायण पांडे, अनुपमा, डॉ. परवीन रुस्तम, रुद्र कुमारी, रोली सिंह, गीता, शकुंतला, अनुष्का, ममता और अनुपम सहित अन्य लोग शामिल रहे।



