काशी की गंगा में नियमों का सन्नाटा, बेलगाम क्रूज और नावों से पर्यटकों की जान खतरे में
न तय रूट, न लाइसेंस का हिसाब, न किराया नियंत्रण; गंगा में दो हजार से अधिक नावों पर सवाल ही सवाल

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की हजारों करोड़ की योजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं, लेकिन गंगा में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। गंगा नदी में संचालित क्रूज, डबल टेकर, मोटर बोट और नावों के संचालन के लिए न तो स्पष्ट नियम-कानून हैं और न ही उनके लिए कोई निर्धारित रूट तय किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक गंगा में दो हजार से अधिक छोटे-बड़े जलयान संचालित हो रहे हैं, जो अपनी मर्जी से कहीं से भी आ-जा रहे हैं। जिम्मेदार विभागों की लापरवाही और नाविकों की मनमानी के चलते गंगा में आए दिन हादसे हो रहे हैं। क्रूज और मोटर बोट से छोटी नावों के टकराने की घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिनमें कई बार पर्यटक घायल हुए हैं और कुछ मामलों में जान भी जा चुकी है।
जल पुलिस समय-समय पर चेकिंग कर क्षमता से अधिक सवारी बैठाने और लाइफ जैकेट न पहनाने पर कार्रवाई जरूर करती है, लेकिन इसे नियमित रूप से लागू कराने के लिए उसके पास स्पष्ट अधिकार नहीं हैं।
लाइसेंस व्यवस्था ठप, आंकड़े भी साफ नहीं
गंगा में नाव संचालन के लिए पहले नगर निगम द्वारा शुल्क लेकर लाइसेंस जारी किए जाते थे, लेकिन शासन स्तर पर व्यवस्था में बदलाव को लेकर मार्च 2024 से न तो नए लाइसेंस जारी हो रहे हैं और न ही पुराने लाइसेंस का नवीकरण किया जा रहा है। ऐसे में गंगा में कितनी नावें वैध रूप से चल रही हैं, इसकी सही जानकारी किसी विभाग के पास नहीं है। पूर्व में करीब 1150 नावों को लाइसेंस दिए जाने का रिकॉर्ड नगर निगम के पास था।
मनमाना किराया वसूली
संत रविदास पार्क से नमो घाट तक चलने वाली अधिकांश नावों, डबल टेकर और मोटर बोट का कोई तय किराया नहीं है। क्रूज को छोड़ दिया जाए तो बाकी नाविक पर्यटकों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। दशाश्वमेध घाट पर प्रति यात्री 300 से 500 रुपये तक लिए जा रहे हैं, जबकि विशेष अवसरों पर यह किराया हजारों में पहुंच जाता है। बजड़ों की बुकिंग पांच लाख रुपये तक बताई जा रही है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
नावों पर रिफ्लेक्टर टेप और सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होने के बावजूद अधिकांश नावों पर यह व्यवस्था नहीं है। कहीं लाइफ जैकेट नहीं मिलती, तो कहीं फटी और खराब जैकेटें दी जाती हैं। जल पुलिस द्वारा कार्रवाई और चेतावनी के बावजूद नाविकों पर इसका खास असर नहीं दिख रहा है।
आरटीओ (प्रवर्तन) मनोज वर्मा के अनुसार, गंगा में नावों के पंजीयन और संचालन की जिम्मेदारी परिवहन विभाग को देने को लेकर शासन स्तर पर बायलॉज बनाए जा रहे हैं। आदेश जारी होते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी। वहीं जल पुलिस प्रभारी राजकिशोर पांडेय ने बताया कि फिलहाल गंगा में नावों के लिए कोई रूट निर्धारित नहीं है, हालांकि लाइफ जैकेट और क्षमता से अधिक सवारी को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है।



