भावना और कामना से भगवत भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है — शालिनी त्रिपाठी
खरौझा गांव में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने नारी सम्मान, भक्ति और रामायण के प्रसंगों पर दिया गहन आध्यात्मिक संदेश

रिपोर्ट: गणपत राय
इलिया। क्षेत्र के खरौझा गांव में हनुमान सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित नवदिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिवस की निशा पर मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को भक्ति, नारी सम्मान और जीवन मूल्यों का गूढ़ संदेश दिया।
कथा के दौरान उन्होंने नारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “नारी का जीवन एक संत के समान होता है। समाज में नारी की पूजा तब तक की जाती है, जब तक उसका चरित्र अक्षुण्ण रहता है।” उनके इस विचार ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
भगवत भक्ति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भगवान तक पहुंचने का मार्ग भावना और कामना दोनों से प्रशस्त होता है। उन्होंने समझाया कि कामना से भजन करने वाला भक्त भगवान को प्राप्त करता है, जबकि भावपूर्ण उपासना करने वाला भक्त ‘भागवत’ का साक्षात्कार करता है। उनके इस आध्यात्मिक विवेचन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।
रामायण प्रसंगों को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने राम, लक्ष्मण और भरत के चरित्रों का सुंदर विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि “भरत जी स्वभाव के प्रतीक हैं, वहीं लक्ष्मण जी प्रभाव के प्रतीक हैं।” इस माध्यम से उन्होंने भाईचारे, त्याग, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान कथा स्थल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से भरा रहा और वातावरण भक्ति रस में डूबा रहा।
इस अवसर पर राकेश सिंह, लोकेश कुमार पांडे, जय नारायण पांडे, राजन सिंह, अस्पताली सिंह, त्रिवेणी दुबे, मुन्ना रोली, अनुपमा, गीता, रीना, गुलजारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।



