संतमत अनुयायी आश्रम गढ़वाघाट के महंत श्री सद्गुरुशरणानन्द जी महाराज का पैतृक गांव सरया में भव्य स्वागत, भक्तों ने की पुष्पवर्षा
नवीन निर्माण के बाद पहली बार जन्मभूमि पहुंचे पीठाधीश्वर, ‘सद्गुरु निवास’ और ‘गुरु मंदिर’ का हुआ भव्य लोकार्पण, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से गूंज उठा पूरा क्षेत्र

रिपोर्ट: गणपत राय
धानापुर क्षेत्र स्थित संतमत अनुयायी आश्रम मठ गढ़वाघाट की शाखा सरया में उस समय भव्य आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला जब आश्रम के पीठाधीश्वर श्रीश्री108 श्री स्वामी सद्गुरुशरणानन्द जी महाराज परमहंस अपने पैतृक एवं जन्मभूमि पर पहुंचे। यह उनके द्वारा नवनिर्माण एवं सुंदरीकरण के बाद पहली यात्रा थी, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय उत्साह और उल्लास का माहौल बन गया।
स्वामी जी ने अपने बाल्यकाल की इसी पावन भूमि से वैराग्य और संन्यास की प्रेरणा प्राप्त की थी। वर्षों बाद जन्मभूमि पर उनके आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला।
आश्रम से लगभग एक किलोमीटर पहले से ही सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और पुरुष सड़क के दोनों ओर खड़े होकर पुष्पवर्षा करते हुए “स्वामीजी की जय” के जयघोष लगा रहे थे। जैसे ही पीठाधीश्वर का आगमन हुआ, पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम नवनिर्मित “सद्गुरु निवास” भवन का विधिवत उद्घाटन किया गया। इसके बाद “गुरु मंदिर” का लोकार्पण किया गया, जहां संत परंपरा के समस्त गुरुओं की चित्र श्रृंखला स्थापित की गई है। स्वामी जी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए समर्पित किया।
सायंकाल आश्रम परिसर फूल-मालाओं और भव्य विद्युत सज्जा से जगमगा उठा। संध्या वंदन, गुरुवंदना और महाआरती के दौरान श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। दो घंटे तक चले भजन-कीर्तन में पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
अपने संबोधन में स्वामी जी ने कहा कि कलियुग में मानव जीवन की मुक्ति नाम स्मरण, सुमिरन और सत्संग से ही संभव है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से निरंतर मानव सेवा और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। शनिवार सुबह पुनः पूजा-अर्चना और मंगल वंदना के बाद स्वामी जी को भावभीनी विदाई दी जाएगी।
इस अवसर पर आश्रम के सचिव प्रकाशध्यानानन्द, धर्मदर्शनानन्द, हरिध्यानानन्द, दिव्यदर्शनानन्द, रूहानीप्रेमानन्द, मंगल कवि, विरेन्द्र यादव प्रधान, राधेश्याम, महेन्द्र, त्रिलोकी, शेषनाथ, केदारनाथ, किसुन यादव, मुन्ना, हरि भैया, प्रभाकर सहित 10,000 से अधिक श्रद्धालु उपस्थित रहे।



