चंदौली में गौ तस्करों का मददगार सिपाही गिरफ्तार, पुलिस नेटवर्क का बड़ा खुलासा
व्हाट्सएप चैट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से खुली पोल, निलंबित आरक्षी सत्येंद्र यादव तस्करों को देता था पुलिस मूवमेंट की जानकारी

रिपोर्ट: लारेंस सिंह
चंदौली में पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां वर्दी की आड़ में गौ तस्करों की मदद करने वाले एक सिपाही को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत की गई इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान निलंबित आरक्षी सत्येंद्र यादव के रूप में हुई है, जो चकराघट्टा थाने में तैनात था। आरोप है कि वह गौ तस्करों को पुलिस की लोकेशन, गश्त और सुरक्षित रास्तों की जानकारी देकर उन्हें चंदौली बॉर्डर पार कराने में मदद करता था।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में पकड़े गए तस्करों के मोबाइल फोन की जांच की गई। व्हाट्सएप कॉल, चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने सीधे तौर पर सिपाही की संलिप्तता उजागर कर दी। जांच में सामने आया कि आरोपी तस्करों से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से मोटी रकम वसूलता था।
मामले पर जानकारी देते हुए एसपी आकाश पटेल ने बताया कि आरोपी पुलिस की हर गतिविधि की सूचना तस्करों तक पहुंचाता था, जिससे वे आसानी से अवैध धंधा संचालित कर सकें। उन्होंने कहा कि मामले में आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।
रविवार को पुलिस टीम ने अंबेडकर नगर के अकबरपुर स्थित पाल बाजार में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी टीम में उपनिरीक्षक तरुण कुमार कश्यप, हेड कांस्टेबल रवि शंकर और अरविंद कुमार शामिल रहे।
बताया जा रहा है कि सत्येंद्र यादव पहले से ही भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में निलंबित चल रहा था और उसके खिलाफ सैयदराजा थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। एसपी ने स्पष्ट किया है कि अब इस नेटवर्क से जुड़े सभी ‘बाहरी और विभागीय’ मददगारों की पहचान कर उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हो।



