उत्तर प्रदेशवाराणसी

रंगभरी एकादशी पर काशी में खिलेगा फूलों का रंगोत्सव

इस्कॉन बनारस के आयोजन में 1100 किलो फूलों से खेली जाएगी होली, 30 से अधिक रंगों में सराबोर होंगे श्रद्धालु

वाराणसी। धर्म और आस्था की नगरी काशी में रंगभरी एकादशी के साथ ही होली का उल्लास अपने चरम पर पहुंचने लगता है। काशी विश्वनाथ धाम में बाबा को रंग अर्पित करने के बाद शहर में होली का पारंपरिक उत्सव शुरू हो जाता है, जो बुढ़वा मंगल तक विभिन्न रूपों में मनाया जाता है।

इसी क्रम में इस वर्ष इस्कॉन बनारस की ओर से एक भव्य फूलों की होली का आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष उत्सव 28 फरवरी को अर्दली बाजार स्थित एल.टी. कॉलेज परिसर में अक्षय पात्र भवन में आयोजित होगा।

1100 किलो फूलों से खेलेंगे भगवान कृष्ण

आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस दिन भगवान लड्डू गोपाल यानी भगवान कृष्ण स्वयं 1100 किलो से अधिक फूलों के साथ होली खेलते प्रतीकात्मक रूप में विराजमान होंगे। श्रद्धालु भी इस प्राकृतिक रंगोत्सव में शामिल होकर फूलों की वर्षा के बीच भक्ति और उल्लास का अनुभव करेंगे।

आयोजकों के अनुसार, यह उत्सव वैदिक संस्कृति और सनातन परंपराओं को जीवंत करने का एक प्रयास है, जिसमें भक्त और भगवान के बीच प्रेम, आनंद और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

30 से अधिक रंगों के फूलों से सजेगा उत्सव

फागुन का महीना प्रकृति में बदलाव और नवजीवन का प्रतीक माना जाता है। पेड़ों पर खिले रंग-बिरंगे फूलों के बीच इस्कॉन द्वारा आयोजित यह प्राकृतिक होली काशी को विशेष रंग में रंग देगी। आयोजन में 30 से अधिक रंगों के फूलों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पूरा परिसर वृंदावन की झलक प्रस्तुत करेगा।

वृंदावन के रंग में रंगेगी काशी

भगवान शिव की नगरी काशी में इस आयोजन के जरिए कृष्ण नगरी की छवि उभरेगी। मान्यता है कि फाल्गुन मास में होली के अवसर पर भक्ति और प्रेम का यह उत्सव भक्तों को आध्यात्मिक आनंद से भर देता है। इस बार काशीवासी फूलों की वर्षा के बीच वृंदावन जैसा अनुभव करेंगे।

रंगभरी एकादशी से शुरू होता है रंगोत्सव

रंगभरी एकादशी वह पावन दिन है जब भक्त अपने आराध्य महादेव को रंग अर्पित करने के बाद होली की शुरुआत करते हैं। काशी में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और देश-विदेश से श्रद्धालु इस अवसर का साक्षी बनने पहुंचते हैं।

इस विशेष फूलों की होली के आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है और माना जा रहा है कि इस बार काशी में भक्ति, उल्लास और प्राकृतिक रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

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