उत्तर प्रदेशचंदौली

चंदौली में धान खरीद व्यवस्था पर सवाल

सांसद वीरेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी को लिखा पत्र, 30% उपज अब भी खरीद से बाहर होने का दावा

रिपोर्ट: अवधेश राय

चंदौली। कृषि प्रधान जनपद चंदौली में धान खरीद व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। स्थानीय सांसद वीरेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी को आधिकारिक पत्र भेजकर धान खरीद की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की 100 प्रतिशत धान खरीद नीति का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि जिले में अब तक किसानों की पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित नहीं की जा सकी है। उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि लगभग 30 प्रतिशत धान अब भी खरीद प्रक्रिया से बाहर है। इस स्थिति से किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और वे आर्थिक दबाव में हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई खरीद केंद्र या तो समय से पहले बंद कर दिए गए हैं या सीमित क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। सांसद के अनुसार, इस अव्यवस्था का लाभ बिचौलिये उठा रहे हैं, जो किसानों से कम दाम पर धान खरीद रहे हैं। उन्होंने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

सांसद ने प्रति हेक्टेयर उत्पादन मानक कम किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उत्पादन मानक घटने से किसान अपनी पूरी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सांसद की प्रमुख मांगें

सांसद ने जिलाधिकारी से निम्नलिखित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई का आग्रह किया है–

  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
  • धान खरीद केंद्रों की अवधि लगभग 20 दिन बढ़ाई जाए।
  • प्रति हेक्टेयर उत्पादन मानक को 65 क्विंटल से बढ़ाकर 85 क्विंटल किया जाए।

सांसद ने कहा कि यदि इन मांगों पर अमल किया जाता है तो किसानों को राहत मिलेगी और बिचौलियों की भूमिका स्वतः समाप्त हो जाएगी।

इस पत्र की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा वाराणसी मंडल के आयुक्त को भी भेजी गई है, ताकि उच्च स्तर पर मामले का संज्ञान लिया जा सके।

किसान संगठनों ने सांसद की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाएगा, जिससे धान खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और किसान हितैषी बन सके।

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