उत्तर प्रदेशवाराणसी

UGC नियमों के विरोध में BHU में बवाल, 5 हजार छात्र सड़कों पर उतरे, पुलिस से झड़प

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद छात्रों का प्रदर्शन, बोले - यह पहली जीत, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा

वाराणसी। UGC के नए समानता/इक्विटी नियमों के खिलाफ काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्रों का विरोध उग्र हो गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली नियमावली, 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगाए जाने के बावजूद, छात्रों ने इसे केवल पहली जीत बताते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

बुधवार को करीब 5 हजार छात्र क्लास छोड़कर सड़कों पर उतर आए, जिसके दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प भी हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए मौके पर तीन थानों की फोर्स तैनात की गई है, जबकि लगभग 500 सुरक्षा कर्मियों को विश्वविद्यालय परिसर और आसपास लगाया गया है।

UGC नियमों पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल करने वाले BHU के शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हुए कहा कि यह छात्रों की पहली जीत है, लेकिन लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार इन नियमों में बदलाव या उन्हें पूरी तरह वापस नहीं लेती।

छात्रों का आरोप है कि UGC के नए नियम सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने की। अदालत ने भी नियमों को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए टिप्पणी की कि “क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं? हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए।”

याचिकाकर्ता और BHU छात्र प्रवीण पाठक ने बताया कि उन्होंने 15 फरवरी को याचिका दायर की थी, जो 24 फरवरी को सूचीबद्ध हुई और 29 जनवरी को सुनवाई हुई। उन्होंने कहा कि याचिका दायर करने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए गंभीरता दिखाई और नियमों पर रोक लगाई।

प्रवीण पाठक ने कहा कि अब आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में शांति मार्च निकालने की घोषणा की है, जिसमें सरकार से मांग की जाएगी कि वह इन नियमों को समाप्त करने की अधिसूचना जारी करे। छात्रों का कहना है कि नए नियमों के चलते कई छात्र भय के माहौल में जी रहे थे और उन्हें पहले से ही दोषी मान लिया जा रहा था।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद BHU सहित देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्रों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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