
वाराणसी: प्रशांत महासागर की सतह के ठंडा होने और ला-नीना के प्रभाव के चलते मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इसका सीधा असर काशी के मौसम पर भी देखने को मिल रहा है। तापमान में अत्यधिक गिरावट न होने के बावजूद शीतलहर और गलन ने लोगों को बेहाल कर दिया है। ठंडी हवाओं के कारण दिन में भी सर्दी का एहसास बना हुआ है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष पोलर वॉर्टेक्स के दक्षिण की ओर खिसकने से हवा की दिशा में बदलाव के बावजूद ठंड से खास राहत नहीं मिल पा रही है। शनिवार सुबह कोहरे का असर अपेक्षाकृत कम रहा और करीब सुबह 9 बजे दृश्यता 800 मीटर दर्ज की गई, लेकिन लगभग 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली पछुआ हवाओं ने पूरे दिन गलन बनाए रखी।
शनिवार को काशी का अधिकतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पहाड़ी शहर शिमला (19.2°C) और कुल्लू (20.5°C) से भी कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 9.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान सामान्य से 6.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 1.3 डिग्री सेल्सियस कम रहा।
मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि अगले दो दिनों तक सुबह के समय कोहरा और ठिठुरन बनी रहेगी, जबकि शाम के समय भी ठंड का असर रहेगा। उन्होंने कहा कि ठंडी हवाओं और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण फिलहाल सर्दी से राहत की संभावना नहीं है।
शीतलहर को देखते हुए नगर निगम भी अलर्ट मोड पर है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर शनिवार को शहरभर में 370 स्थानों पर अलाव जलाए गए। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, कचहरी परिसर, शेल्टर होम, प्रमुख सड़कों और व्यस्त चौराहों पर यह व्यवस्था की गई है, ताकि खुले में रहने वाले और राहगीरों को रात के समय ठंड से राहत मिल सके।



