नाम जप में श्रद्धा और समर्पण जरूरी, तभी मिलता है सच्चा फल— शालिनी त्रिपाठी
खरौझा गांव में श्रीराम कथा के चौथे दिन अजामिल प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन, गुरु महिमा पर भी दिया जोर

रिपोर्ट: गणपत राय
इलिया क्षेत्र के खरौझा गांव में हनुमान सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित नवदिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया और भक्ति के गूढ़ संदेशों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया।
कथा के दौरान उन्होंने अजामिल प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि केवल भगवान का नाम लेने से ही फल नहीं मिलता, बल्कि उसे श्रद्धा, उपासना और पूर्ण समर्पण भाव से लेना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अजामिल ने भगवान का नाम मोह और वासना के प्रभाव में लिया था, जबकि सच्चा फल तब मिलता है जब नाम जप अंतःकरण की शुद्धता और सच्ची आस्था के साथ किया जाए।
उन्होंने आगे गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही जीवन के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। गुरु के बिना ज्ञान अधूरा और साधना निष्फल रहती है। भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि गुरु वशिष्ठ ने उनका नामकरण संस्कार संपन्न कराया और महर्षि विश्वामित्र के सानिध्य में उन्होंने अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की, जिससे उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हुआ।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव में लीन होकर कथा का आनंद लिया। इस अवसर पर राजन सिंह, अस्पताली सिंह, त्रिवेणी दुबे, श्रीराम चौबे, जय नारायण पांडे, मुन्ना, रोली सिंह, नंदिनी पांडे, ममता सिंह, अनुपम सिंह, गीता, रीना सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।



