उत्तर प्रदेशचंदौली

पं. कमलापति त्रिपाठी की 121वीं जयंती पर चंदौली में हुआ भव्य आयोजन, ललितेशपति त्रिपाठी ने गिनाए विकास कार्य

सिंचाई, कृषि, रेलवे, शिक्षा और स्वास्थ्य को विकास से जोड़ने के लिए याद किए गए पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व रेल मंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी

रिपोर्ट: गणपत राय 

चंदौली। पंडित कमलापति त्रिपाठी स्मृति सेवा संस्थान की ओर से गुरुवार, 3 सितंबर को चंदौली स्थित कमलापति त्रिपाठी पार्क में पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रेल मंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार पं. कमलापति त्रिपाठी की 121वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में उनके प्रपौत्र एवं पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन पंडित कमलापति त्रिपाठी स्मृति सेवा संस्थान के संयोजक धर्मेंद्र तिवारी ने किया। इस दौरान वक्ताओं ने पं. कमलापति त्रिपाठी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के साथ-साथ चंदौली और पूर्वांचल के विकास में उनके योगदान को याद किया।

सिंचाई व्यवस्था से बदली चंदौली की पहचान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी ने चंदौली, वाराणसी और पूरे पूर्वांचल के विकास को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सिंचाई, कृषि, रेलवे, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे को विकास का आधार बनाया।

उन्होंने कहा कि चंदौली को “धान का कटोरा” बनाने में पं. कमलापति त्रिपाठी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके प्रयासों से नहरों, बांधों और पंप कैनाल जैसी सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ, जिससे कृषि भूमि को सिंचाई उपलब्ध हुई और धान उत्पादन को बढ़ावा मिला।

उन्होंने कहा कि सिंचाई व्यवस्था का विस्तार केवल नहरों के निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य किसानों की पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना था। सिंचाई बढ़ने से खेती और उत्पादन बढ़ा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।

शिक्षा और स्वास्थ्य को भी दी प्राथमिकता

सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी के विकास मॉडल में शिक्षा और स्वास्थ्य को भी विशेष महत्व दिया गया। चंदौली में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।

उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के विकास के लिए रेलवे को मजबूत करने की उनकी सोच भी महत्वपूर्ण थी। मुगलसराय रेलवे क्षेत्र और डीरेका के आधुनिकीकरण तथा रेलवे के विस्तार की दिशा में किए गए कार्यों का क्षेत्र के व्यापार और आवागमन पर व्यापक प्रभाव पड़ा।

वाराणसी को पूर्वांचल के विकास का केंद्र माना

वक्ताओं ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी वाराणसी से जुड़े राष्ट्रीय नेता थे और उन्होंने काशी विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त की थी। उनकी राजनीतिक दृष्टि में वाराणसी केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के आर्थिक और सामाजिक विकास का केंद्र भी थी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के अध्यक्ष डॉ. नारायण मूर्ति ओझा ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी का विकास मॉडल रेलवे और सड़क के माध्यम से बाजारों को जोड़ने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और पूरे पूर्वांचल के समग्र विकास पर आधारित था।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से चंदौली में आज भी पं. कमलापति त्रिपाठी को केवल पूर्व मुख्यमंत्री या कांग्रेस नेता के रूप में नहीं, बल्कि “विकास पुरुष” के रूप में याद किया जाता है। आज भी चंदौली में सिंचाई और नहरों की चर्चा होने पर उनका नाम प्रमुखता से सामने आता है।

कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से अतिथियों, सम्मानित नागरिकों और कांग्रेसजनों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरुण द्विवेदी, मुगलसराय शहर अध्यक्ष बृजेश गुप्ता, देवेंद्र प्रताप सिंह, आनंद शुक्ला, सतीश बिंद, राम जी गुप्ता, राम आधार जोसेफ, श्री राम यादव, प्रदीप मिश्रा, राहुल सिंह, विजय तिवारी, नेहाल अख्तर बाबू, रजनीकांत पांडे, प्रताप नारायण पांडे, मधु राय, दुर्गा दत्त, दिनेश चंद्र त्रिपाठी, शशिनाथ उपाध्याय, गंगा प्रसाद, श्रीकांत पाठक, शमशेर अली, राकेश सिंह, विवेक सिंह, सत्येंद्र उपाध्याय, हर्ष तिवारी, दशरथ चौहान सहित बड़ी संख्या में सम्मानित नागरिक एवं कांग्रेसजन मौजूद रहे।

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