भगवान का बनकर रहने पर ही जीवन सार्थक: कथावाचक संत दास जी महाराज
कमालपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्म का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

रिपोर्ट: अवधेश राय
कमालपुर। श्री राम जानकी मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ शुक्रवार को चौथे दिन भी श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी रहा। श्री राम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित कथा में अयोध्या से पधारे कथावाचक संत दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उससे जुड़े आध्यात्मिक रहस्यों का विस्तार से वर्णन किया। कथा सुनकर मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथावाचक संत दास जी महाराज ने कहा कि प्रभु की शरण में रहने से ही मानव जीवन धन्य और सार्थक होता है। मानव शरीर नश्वर है और एक दिन इसे छोड़ना पड़ता है। ऐसे में मन में भगवान नारायण को बसाकर भक्ति और विश्वास के साथ जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना विश्वास के भक्ति अधूरी है। प्रभु पर विश्वास रखने से ही जीवन का कल्याण संभव है।
उन्होंने भगवान शिव का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान शंकर ने विषपान कर समस्त संसार का कल्याण किया, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ महादेव के नाम से जाना गया। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि यदि व्यक्ति अपने व्यापार और अन्य व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर प्रभु की कथा का श्रवण करता है, तो उसकी भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए संत दास जी महाराज ने बताया कि मथुरा की जेल में श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कारागार के द्वार खुल गए और पहरेदार सो गए। उन्होंने इसे भगवान की दिव्य महिमा बताया और कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से समाज को धर्म, विश्वास और सदाचार का संदेश दिया।
इस अवसर पर कामता जायसवाल, शिवदयाल गुप्ता, हरिवंश उपाध्याय, अमरनाथ जायसवाल, त्रिलोकीनाथ जायसवाल, सुनील उपाध्याय, संजय रस्तोगी, बाल गोविंद रस्तोगी, अनिल जायसवाल, ओंकार रस्तोगी, जयप्रकाश उपाध्याय, संतोष कुमार, अवधेश रस्तोगी, भोलेनाथ जायसवाल, मुन्नी लाल जायसवाल, रमेश रस्तोगी, सीताराम वर्मा, बिनोद अग्रहरि, राजकुमार यादव, कल्लू उपाध्याय, संजय अग्रहरि, शिवजी वर्मा, अनिल गुप्ता, प्रदीप रस्तोगी, अखंडानंद तिवारी, गोपीनाथ जायसवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।



