एक एकड़ में 10 क्विंटल मसूर की रिकॉर्ड पैदावार, वैज्ञानिक तकनीक से बदली किसानों की किस्मत
चंदौली के किसान ने ‘IPL 225’ बीज और जीरो टिल तकनीक से हासिल की बंपर उपज, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया सफलता का फॉर्मूला

रिपोर्ट: लारेंस सिंह
चंदौली जिले के धानापुर क्षेत्र में किसानों ने आधुनिक खेती का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गया है। बुद्धपुर गांव के किसान राजनाथ उपाध्याय ने एक एकड़ जमीन में 10 क्विंटल से अधिक मसूर की पैदावार कर रिकॉर्ड बना दिया है।
इस सफलता के पीछे उन्नत किस्म ‘IPL 225’ और वैज्ञानिक तकनीकों का बड़ा योगदान है। यह किस्म न सिर्फ रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी है, बल्कि इसकी फलियां और दाने भी सामान्य मसूर की तुलना में अधिक वजनदार होते हैं, जिससे उत्पादन में सीधा फायदा मिलता है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए किसानों को आधुनिक खेती अपनाने की सलाह दी। प्रोफेसर मनोज कुमार सिंह और प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह ने खेत पर पहुंचकर किसानों को स्पष्ट तौर पर समझाया कि बार-बार जुताई करने के बजाय ‘जीरो टिल’ तकनीक अपनाना ज्यादा फायदेमंद है।
इस तकनीक के जरिए बिना जुताई के बुआई की जाती है, जिससे डीजल और समय की बचत होती है। साथ ही, पानी की खपत कम होती है और मजदूरी का खर्च भी लगभग आधा रह जाता है।
खरपतवार की समस्या को लेकर भी वैज्ञानिकों ने किसानों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि सही तरीके से खरपतवार नियंत्रण करने पर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।
आने वाले समय में एफपीओ के माध्यम से किसानों को निशुल्क बीज और आधुनिक कृषि मशीनें उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जा रही है। शिवानन्दम एफपीओ के निदेशक रमेश सिंह और ओमप्रकाश सिंह ने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक खेती को अपनाएं, तभी मेहनत के अनुपात में बेहतर मुनाफा मिल सकेगा।



