गैस की किल्लत से चंदौली में बढ़ी जलावन लकड़ी की मांग, 500 से 800 रुपये क्विंटल पहुंची कीमत
रसोई गैस की कमी से लोग चूल्हे का सहारा लेने को मजबूर, लकड़ी के दाम बढ़ने से आम जनता और डेयरी संचालकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

रिपोर्ट: लारेंस सिंह
चंदौली जिले में रसोई गैस की किल्लत का असर अब बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण लोग मजबूरी में चूल्हे पर खाना बनाने लगे हैं, जिससे जलावन लकड़ी की मांग अचानक बढ़ गई है। बढ़ती मांग के चलते बाजार में लकड़ी की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ समय पहले तक बाजार में जलावन लकड़ी करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से मिल जाती थी, लेकिन गैस की किल्लत के बाद इसकी कीमत बढ़कर करीब 800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरों में भी लोग रसोई गैस के विकल्प के तौर पर लकड़ी का उपयोग कर रहे हैं।
गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर डेयरी संचालकों पर भी पड़ रहा है। दूध उबालने और अन्य कामों के लिए बड़ी मात्रा में ईंधन की जरूरत होती है, लेकिन गैस उपलब्ध नहीं होने और लकड़ी के महंगे होने से उनका खर्च बढ़ गया है।
यादव डेयरी के संचालक विनोद यादव ने बताया कि गैस की उपलब्धता न होने से डेयरी चलाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि पहले जो लकड़ी 500 रुपये में मिल जाती थी, वही अब 800 रुपये में मिल रही है, जिससे डेयरी संचालन काफी महंगा हो गया है।
वहीं, आम नागरिक भी गैस एजेंसियों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं और मजबूरी में चूल्हे का सहारा ले रहे हैं। हालांकि जलावन लकड़ी के बढ़ते दामों ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रसोई गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो लकड़ी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।



