काशी में पार्थिव शिवलिंग पूजन का आयोजन, देशभर से जुटे श्रद्धालु
वाराणसी में आदि शांकराचार्य जयंती पर आयोजित पूजन में देशभर से पहुंचे श्रद्धालु, विधि-विधान से हुआ आयोजन
धर्म और आध्यात्म की नगरी वाराणसी में आदि शंकराचार्य जयंती के पावन अवसर पर पार्थिव पूजन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर अपनी गहरी आस्था प्रकट की। आयोजन की तिथि में बदलाव के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई।
आयोजन के संयोजक पंडित विनोद भार्गव ने बताया कि यह आयोजन पिछले दो वर्षों से लगातार किया जा रहा है और हर वर्ष इसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि शिव पुराण में पार्थिव पूजन को कलियुग में अत्यंत शुभ और शीघ्र फलदायी माना गया है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हो रहे हैं।
पूजन की शुरुआत गौरी-गणेश पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह पूजन के साथ विधिवत रूप से हुई। इसके बाद यजमानों ने संकल्प लेकर आत्मशुद्धि की प्रक्रिया पूरी की और अपने हाथों से मिट्टी का पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा-अर्चना की। पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
इस आयोजन में संतान प्राप्ति, शिक्षा में सफलता, रोजगार, परिवार में सुख-शांति और रोग मुक्ति जैसी विभिन्न मनोकामनाओं के साथ श्रद्धालु शामिल हुए। कोलकाता, दिल्ली और वाराणसी सहित कई शहरों से आए लोगों ने विधि-विधान से पूजा कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पार्थिव पूजन से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ, जिसे उन्होंने अपने जीवन का एक विशेष आध्यात्मिक क्षण बताया।
आयोजक पंडित विनोद भार्गव ने बताया कि यह आयोजन आगे भी निरंतर जारी रहेगा और भविष्य में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में भी पार्थिव शिवलिंग पूजन की योजना बनाई जा रही है।
कुल मिलाकर, काशी में आयोजित यह पार्थिव पूजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का भी सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।



