संसद में पप्पू यादव के प्रदर्शन पर भड़के महंत राजू दास, बोले- ‘कालनेमि जैसे नेताओं का विरोध करो’
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर विपक्ष के सांकेतिक प्रदर्शन को बताया संत समाज और सनातन परंपरा का अपमान

अयोध्या के हनुमानगढ़ी से जुड़े महंत राजू दास इन दिनों अपने तीखे बयान को लेकर चर्चा में हैं। संसद के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर के कथित चढ़ावा विवाद पर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा किए गए सांकेतिक विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई है। महंत राजू दास ने कहा कि साधु-संत का वेश धारण कर इस प्रकार का प्रदर्शन करना संत समाज और सनातन परंपरा का अपमान है।
संसद परिसर में पप्पू यादव भगवा वस्त्र और साधु के वेश में पहुंचे थे। उनके साथ एक प्रतीकात्मक दानपेटी भी थी। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने पुजारी की भूमिका निभाते हुए सांसदों से सांकेतिक रूप से दान लिया और फिर दान की राशि लेकर भागने का अभिनय किया। विपक्षी सांसदों ने भी सांकेतिक नाट्य प्रस्तुति में भाग लिया। इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
महंत राजू दास ने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को साधु-संतों से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, क्या वे साधु-संत थे। उन्होंने राहुल गांधी, पप्पू यादव और समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं की भी आलोचना करते हुए कहा कि किसी अन्य धर्म के धार्मिक वेश में इस प्रकार का प्रदर्शन क्यों नहीं किया जाता।
अपने बयान में उन्होंने संत समाज से अपील करते हुए कहा कि ऐसे नेताओं का विरोध किया जाना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि “कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कालनेमि जैसे नेता यदि संतों की शरण में आएं तो उनका विरोध करो।” इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।
कौन हैं महंत राजू दास?
महंत राजू दास अयोध्या की हनुमानगढ़ी से जुड़े संत हैं और स्वयं को नागा साधु बताते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बचपन में ही उनके माता-पिता ने उन्हें हनुमान जी को समर्पित कर दिया था और उनका पालन-पोषण हनुमानगढ़ी में हुआ। उन्होंने वहीं रहकर शिक्षा प्राप्त की तथा बाद में के.एस. साकेत पीजी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एमए और एलएलबी की पढ़ाई की।
कॉलेज के दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे और वर्ष 2018 तक छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। इसके बाद उन्होंने बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर उनके बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं।


