सुगंधित पौधों की खेती से संवर सकता है ग्रामीण भविष्य
चहनियां के मां खंडवारी पीजी कॉलेज में ग्रामीण युवाओं व महिलाओं के लिए उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला आयोजित

रिपोर्ट: गणपत राय
चहनियां। मां खंडवारी पी.जी. कॉलेज, चहनियां में गुरुवार को विकास आयुक्त कार्यालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र विस्तार इकाई, कानपुर तथा साईं इंस्टिट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, वाराणसी के संयुक्त सहयोग से किया गया। कार्यशाला में “सुगंधित पौधों की खेती एवं विपणन” विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. भक्ति विजय शुक्ला एवं कॉलेज के प्रबंधक डॉ. राजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. भक्ति विजय शुक्ला ने कहा कि सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका का एक सशक्त, टिकाऊ और लाभकारी साधन बन सकती है। कम लागत में अधिक मुनाफे की संभावना वाला यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकता है।
साईं इंस्टिट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, वाराणसी के निदेशक अजय सिंह ने कहा कि सुगंधित एवं औषधीय पौधों पर आधारित उद्यम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ उद्यमशीलता की सोच विकसित कर प्रतिभागियों को बाजार से जोड़ने में सहायक होते हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में कॉलेज के प्रबंधक डॉ. राजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि सुगंधित एवं औषधीय पौधे देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं। इस तरह के प्रशिक्षण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में आईपीआर विशेषज्ञ संजय रस्तोगी ने सुगंधित पौधों की व्यावसायिक खेती, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, बौद्धिक संपदा अधिकार और विपणन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अश्वनी कुमार श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। संचालन संतोष कुमार सिंह ने किया।



