उत्तर प्रदेशचंदौली

सदर कोतवाली तोड़फोड़ मामले में सुस्त कार्रवाई, विवेचना अधर में; जांच अधिकारी का तबादला बना चर्चा का विषय

17 दिसंबर की घटना के बाद आगे नहीं बढ़ी जांच, सीओ सदर ने विवेचना का हवाला देकर साधी चुप्पी, बीच जांच दरोगा का ट्रांसफर

रिपोर्ट: गणपत राय

चंदौली जिले की सदर कोतवाली में हुई तोड़फोड़ और पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की के मामले में पुलिस की कार्रवाई शिथिल होती नजर आ रही है। बीते 17 दिसंबर को हुई इस गंभीर घटना के बावजूद न तो जांच में तेजी दिखी और न ही अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। पुलिस खुद ही इस प्रकरण में उलझती दिखाई दे रही है।

मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी (सीओ) सदर देवेंद्र कुमार बार-बार क्षेत्रीय चौकी इंचार्ज द्वारा विवेचना किए जाने की बात कहकर कन्नी काटते नजर आए। इससे पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, 17 दिसंबर को राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता श्रीवास्तव केजी नंदा अस्पताल पहुंची थीं। आयोग की सदस्य के अनुसार, वह पुलिस के साथ अस्पताल गई थीं। अस्पताल में कहासुनी के बाद वह लखनऊ चली गईं, लेकिन इस घटना से आक्रोशित बड़ी संख्या में लोग सदर कोतवाली पहुंच गए और वहां जमकर हंगामा व तोड़फोड़ की गई।

इस मामले में उप निरीक्षक देवेंद्र बहादुर सिंह की तहरीर पर अस्पताल प्रबंधक आनंद प्रकाश तिवारी समेत कई नामजद आरोपियों और करीब 150 अज्ञात महिला-पुरुषों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। एफआईआर में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धारा भी शामिल की गई है।

बीच विवेचना दरोगा का तबादला

मामले की विवेचना कर रहे कस्बा चौकी इंचार्ज देवेंद्र कुमार सिंह का अचानक तबादला कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक आदित्य लांघे ने शुक्रवार को जिले में चार उप-निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया, जिसके तहत देवेंद्र कुमार सिंह को मझगवां भेज दिया गया, जबकि वीरेंद्र कुमार यादव को चंदौली कस्बा चौकी प्रभारी बनाया गया।

बीच जांच विवेचक के तबादले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब विवेचना अभी पूरी नहीं हुई थी, तो फिर जांच अधिकारी को क्यों हटा दिया गया। फिलहाल सदर कोतवाली तोड़फोड़ मामले में पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

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