मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एफएसडीए का बड़ा एक्शन, कोडीनयुक्त कफ सिरप की पैरेलल सप्लाई चेन ध्वस्त
52 जिलों में सघन जांच, 161 फर्मों पर एफआईआर, 700 करोड़ से अधिक की संदिग्ध आपूर्ति जांच के घेरे में; एनडीपीएस और बीएनएस के तहत सख्त कार्रवाई

लखनऊ, 29 दिसंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने कोडीनयुक्त कफ सिरप और एनडीपीएस श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण और डायवर्जन के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में कोडीन कफ सिरप की समानांतर अवैध सप्लाई चेन को ध्वस्त कर दिया गया है, जिसे देश का अब तक का सबसे बड़ा क्रैकडाउन माना जा रहा है।
पिछले तीन महीनों में एफएसडीए ने 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की। जांच के दौरान 36 जनपदों में अवैध डायवर्जन का खुलासा हुआ, जिसके आधार पर 161 फर्मों और संचालकों के खिलाफ बीएनएस और एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई। साथ ही जिलाधिकारियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर अवैध नशे से अर्जित संपत्तियों की जब्ती के निर्देश भी दिए गए हैं।
एफएसडीए ने इस बड़े एक्शन से पहले देश के कई राज्यों- झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड- में गहन विवेचना की। जांच में यूपी के सुपर स्टॉकिस्ट और होलसेलरों के साथ उनके कारोबारी संबंधों के पुख्ता सबूत जुटाए गए। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, ग्वालियर से कोडीन फॉस्फेट के कोटा और उठान के विवरण प्राप्त किए गए, वहीं कफ सिरप निर्माता कंपनियों और वितरण नेटवर्क की गहन जांच की गई।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की आपूर्ति वास्तविक चिकित्सीय आवश्यकता से कई गुना अधिक थी। कई फर्में वैध विक्रय बिल प्रस्तुत करने में असफल रहीं, जबकि कुछ ने केवल कागजी अभिलेखों में ही क्रय-विक्रय दिखाया। जांच में फेन्सिडिल, एस्कॉफ समेत करोड़ों बोतलों की आपूर्ति दर्ज मिली, जिनका चिकित्सीय उपयोग प्रमाणित नहीं हो सका।
एफएसडीए की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने अब तक 79 अभियोग दर्ज किए हैं, जिनमें 85 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी भी सक्रिय है और आने वाले माह में जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने की संभावना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर थोक औषधि विक्रय लाइसेंसिंग प्रणाली को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है, जिसमें जीओ-टैगिंग, भंडारण क्षमता का सत्यापन और टेक्निकल पर्सन के अनुभव प्रमाण पत्र की जांच शामिल है।



