बाल महोत्सव में बच्चों ने सुनाई बदलाव की कहानियां, मीना मंच के तहत 60 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
कॉमिक बुक और ‘अपने बदलाव की कहानी’ प्रतियोगिता में बच्चों ने साझा किए स्कूल, दोस्ती और आत्मविश्वास के अनुभव
रिपोर्ट: गणपत राय
चंदौली। बाल महोत्सव के अवसर पर मीना मंच के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिता में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों ने अपने जीवन में आए बदलावों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में कुल 60 बच्चों ने प्रतिभाग किया, जिनमें 30 बच्चों ने “अपने बदलाव की कहानी” लिखी, जबकि 30 बच्चों ने कॉमिक बुक/पोस्टर के माध्यम से अपनी सोच को अभिव्यक्त किया।
बच्चों ने मां की उंगली पकड़कर घर से निकलने, धीरे-धीरे विद्यालय पहुंचने, पहला दोस्त बनाने और साथ मिलकर खेलने जैसे अनुभव साझा किए। यह आयोजन मीना मंच के तहत प्रतिभावान विद्यार्थियों की खोज के उद्देश्य से किया गया, जिसमें दो प्रमुख बिंदु—कॉमिक बुक और अपने बदलाव की कहानी—शामिल रहे।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी अमिता श्रीवास्तव ने बताया कि मीना मंच आत्म-सम्मान, जीवन कौशल और लैंगिक समानता से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का एक सशक्त माध्यम है। राज्य परियोजना के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत “प्रगति–स्वाभिमान और सफलता की ओर–2.0” बाल उत्सव का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों के सपनों, आकांक्षाओं और उनके भीतर आए सकारात्मक बदलावों को मंच प्रदान करना है।
ब्लॉक स्तर पर चयनित मॉडल मीना मंच विद्यालयों से चयनित प्रतिभागियों ने जनपद स्तर पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान 30 बच्चों ने मीना मंच एवं सेल्फ एस्टीम से जुड़ी गतिविधियों से अपने भीतर आए बदलावों की कहानी का वाचन किया, वहीं 30 बच्चों ने जेंडर स्टीरियोटाइप विषय पर कॉमिक बुक/पोस्टर तैयार किए।
कार्यक्रम में बदलाव की कहानी श्रेणी में कृपानन्द, अदिति चौरसिया, रूचि प्रजापति, तृषा गुप्ता और कृतिका विश्वकर्मा को, जबकि कॉमिक बुक/पोस्टर प्रतियोगिता में पूजा, अनुष्का, वर्षा, अभिषेक कुमार और रूबिना को मुख्य अतिथि बिकायल भारती, प्राचार्य डायट द्वारा पुरस्कृत किया गया।



