चंदौली में धान खरीद को लेकर सियासत तेज, ट्रैक्टर के साथ सड़क पर उतरे सपा नेता मनोज सिंह डब्लू
किसानों के समर्थन में नवीन मंडी पहुंचे पूर्व विधायक, पुलिस ने रास्ते में रोका; मौके पर शुरू हुई धान की तौल, लगभग 300 कुंतल खरीद

रिपोर्ट: अवधेश राय
उत्तर प्रदेश के चंदौली में धान खरीद को लेकर किसानों की नाराजगी अब सियासी मुद्दा बनती दिख रही है। सोमवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू किसानों के समर्थन में सड़क पर उतर आए।
धान से लदे ट्रैक्टर के साथ सैयदराजा स्थित अपने आवास से नवीन मंडी की ओर निकलते ही पुलिस ने उन्हें हाईवे पर रोक लिया और नोटिस तामील कर आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसानों के हितों का हवाला देते हुए वे अपने समर्थकों के साथ मंडी तक पहुंच गए।
नवीन मंडी पहुंचने के बाद वहां पहले से मौजूद डिप्टी आरएमओ की निगरानी में किसानों के धान की तौल शुरू कराई गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान करीब 300 कुंतल धान की खरीद सुनिश्चित कराई गई, जिससे कई किसानों को राहत मिली।
इस दौरान जिले के अलग-अलग इलाकों से मंडी की ओर आ रहे किसानों को पुलिस ने कई जगहों पर रोक लिया। प्रशासन की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया कि उनके नजदीकी क्रय केंद्रों पर ही धान की तौल और अंगूठा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों पर पुलिस की सघन निगरानी भी देखी गई, ताकि मंडी में भीड़ या किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
मंडी परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए मनोज सिंह डब्लू ने कहा कि धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध इस जिले में किसान अपनी उपज बेचने के लिए “खून के आंसू” रोने को मजबूर हैं। उन्होंने दावा किया कि कई किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में क्रय केंद्रों पर किसानों से अतिरिक्त उपज ली जा रही है और अंगूठा सत्यापन के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं। उनके मुताबिक, कई किसानों को इस प्रक्रिया के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
हालांकि, प्रशासन का कहना है कि किसानों की समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और जिन किसानों को रास्ते में रोका गया है, उनके धान की तौल स्थानीय स्तर पर कराई जाएगी। साथ ही 28 फरवरी तक शेष बचे किसानों के धान की खरीद पूरी कराने का आश्वासन भी दिया गया है।
सोमवार की इस कार्रवाई से कुछ किसानों को राहत जरूर मिली है, लेकिन जिले में धान खरीद की पारदर्शिता और समयबद्धता को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं। किसान संगठनों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।



