गुरु शिक्षा से निखरा श्रीराम का चरित्र, विनम्रता से शांत हुआ परशुराम का क्रोध
इलिया में श्रीराम कथा के पांचवें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, कथा वाचक ने जीवन मूल्यों का दिया संदेश

रिपोर्ट: गणपत राय
चंदौली। इलिया कस्बे में मां काली सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नव दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन सोमवार को भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत माहौल देखने को मिला। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे, जहां कथा वाचक पंडित मारुति किंकर जी महाराज ने भगवान श्रीराम और उनके अनुजों के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान महाराज जी ने बताया कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को गुरु आश्रम में मिली शिक्षा-दीक्षा ही उनके दिव्य चरित्र की सबसे बड़ी नींव बनी। गुरु के सान्निध्य में प्राप्त संस्कारों ने ही श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान केवल पुस्तकीय विद्या नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली सीख है।
इस दौरान मिथिला में धनुष भंग प्रसंग का भी मार्मिक वर्णन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करने के बाद परशुराम के क्रोध का दृश्य और फिर श्रीराम की विनम्रता से उसका शांत होना श्रोताओं को भाव-विभोर कर गया। महाराज जी ने इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया कि जीवन में आने वाले हर संघर्ष का समाधान संयम और विनम्रता से ही संभव है।
कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्रीय सांसद छोटेलाल खरवार ने विधिवत पोथी पूजन कर किया। इस अवसर पर राजेश गुप्ता, दशरथ केसरी, निरुपमा केसरी, राजेश कुमार, बृजेश गुप्ता समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे पंडाल में “जय श्रीराम” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।



