उत्तर प्रदेशवाराणसी

काशी विश्वनाथ धाम में रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ पहली बार खादी परिधान में गौना करने निकले

1934 की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा निर्णय, मां पार्वती की विदाई संग काशी में होली उत्सव की हुई शुरुआत

वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में इस बार रंगभरी एकादशी विशेष ऐतिहासिक महत्व के साथ मनाई जा रही है। देवाधिदेव महादेव पहली बार खादी वस्त्र धारण कर मां पार्वती का गौना लेकर ससुराल से काशी लौटेंगे। महंत निवास के पं. वाचस्पति तिवारी ने बताया कि बाबा भोले शाही पगड़ी, धोती-कुर्ता और दुपट्टा पहनकर बारात में शामिल होंगे और मां गौरी की विधिवत विदाई कराएंगे।

उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का विवाह संपन्न होता है, जिसे भक्त पूरी रात जागरण कर मनाते हैं। इसके बाद आने वाली एकादशी को बाबा का गौना होता है। इसी दिन बाबा अपने ससुराल से मां पार्वती को काशी लेकर आते हैं और यहीं से काशी में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।

हर वर्ष रंगभरी एकादशी पर बाबा रेशमी जोड़ा-जामा में सजते रहे हैं, लेकिन इस बार खादी परिधान धारण करने का निर्णय 1934 की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में पंडित जवाहरलाल नेहरू की माता स्वरूप रानी नेहरू ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई थी और देश की आजादी के लिए प्रार्थना की थी। उसी समय उन्होंने देवाधिदेव महादेव को खादी पहनाने की इच्छा प्रकट की थी।

रंगभरी एकादशी पर लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ और मां गौरी के गौना उत्सव के साक्षी बनते हैं। इस बार खादी परिधान में सजे बाबा के दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह है। मंदिर ट्रस्ट ने आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और श्रद्धालुओं से शांतिपूर्ण एवं परंपरागत ढंग से उत्सव मनाने की अपील की है।

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